हेमंत आर्य। शनिवार 22 नवंबर की शाम भारतीय जनता पार्टी ने अपने 2 मोर्चा संगठनों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की। इन नियुक्तियों में सबसे चौकाने वाला नाम भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पद पर की गई नियुक्ति का रहा। इस पद पर भाजपा ने साधारण परिवार और राजनीतिक पृष्ठ भूमि वाले शाजापुर के युवा और वर्तमान में भाजयुमो जिला अध्यक्ष श्याम टेलर को नियुक्त कर सबको चौका दिया। महज करीब 29 साल की उम्र में टेलर को प्रदेश संगठन की कमान सौंपकर भाजपा ने मध्यप्रदेश की राजनीति में अपनी चौथी पीढ़ी का रास्ता साफ कर दिया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अभी भी 80 के दशक के फुंके हुए कारतूसों और पुराने चेहरों के इशारों पर ही चल रही है मध्यप्रदेश में।
गौरतलब है कि जबसे हमने होश संभाला तब से ही मध्यप्रदेश में भाजपा-कांग्रेस की बात की जाए तो भाजपा की प्रदेश राजनीति में स्व. कुशाभाऊ ठाकरे, स्व. सुंदरलाल पटवा, स्व. कैलाश जोशी, स्व. बाबूलाल गौर केंद्र में थे और कांग्रेस की राजनीति स्व. अर्जुन सिंह, कमलनाथ, स्व. माधवराव सिंधिया, स्व. सुभाष यादव और दिग्विजय के इर्द गिर्द घूमती थी। उस दौर में मध्यप्रदेश की राजनीति में कांग्रेस का दबदबा था। समय बदलता रहा और भाजपा समय के साथ अपने प्रदेश और स्थानीय नेतृत्व में परिवर्तन करती रही। उस पीढ़ी के बाद भाजपा ने उमा भारती, शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्रसिंह तोमर जैसे नेताओं के हाथों में प्रदेश की बागडोर सौंपी, जबकि कांग्रेस उन्हीं पुराने चेहरों और उनके सिपहसालारों पर दांव लगाती रही। हालांकि अर्जुन सिंह, सुभाष यादव और माधवराव सिंधिया इस बीच स्वर्गीय हो चुके थे। भाजपा की दूसरी पीढ़ी ने वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश की राजनीति से कांग्रेस को उखाड़ फेंका और मतदाताओं के बीच अपनी मजबूत जड़े जमा ली। 2003 से 2018 तक भाजपा द्वारा मध्यप्रदेश की सत्ता में हैट्रिक लगाने के बाद महज करीब 19 माह तक कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की सत्ता में वापसी की, लेकिन जोड़ तोड़ कर भाजपा ने 2020 में फिर अपनी सरकार बना ली। 2018 चुनाव तक भाजपा ने अपनी दूसरी पीढ़ी पर भरोसा जताया, लेकिन कांग्रेस 80 के दशक वाले नेताओं पर ही निर्भर रही।
2023 विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद सत्ताधारी भाजपा ने एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन करते हुए डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया और उनकी अगुवाई में भाजपा की तीसरी पीढ़ी का उदय हुआ मध्यप्रदेश में। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा की तीसरी पीढ़ी ने मध्यप्रदेश में मोर्चा संभाला हुआ है, जबकि कांग्रेस अभी भी अपनी मारक क्षमता खो चुके फुंके हुए कारतूस और उनके शार्गिदों से ही बाहर नहीं निकल पा रही है। आम मतदाताओं द्वारा कई बार नकारे जाने के बाद भी 80 के दशक के फुंके हुए कारतूस अभी भी प्रदेश की राजनीति से अपने आपको दूर नहीं कर पा रहे हैं। पर्दे के पीछे से अभी भी ये नेता प्रदेश के विभिन्न जिलों में फैले इनके क्षेत्रीय क्षत्रपों के माध्यम से खच्चरों के पैरों में घोड़े की नाल ठोंककर उन्हें रेस में दौड़ाते रहते हैं। साथ ही मतदाताओं द्वारा नकारे गए नेताओं के पुत्रों को भी जबरन पार्टी में थोपा जा रहा है, जिसका गलत संदेश पार्टी कार्यकर्ताओं और आम मतदाताओं के बीच जा रहा है।
समय के साथ अपने प्रदेश और स्थानीय नेतृत्व में परिवर्तन कर वर्तमान में भाजपा मध्यप्रदेश की सिरमौर एवं आम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय पार्टी बनी हुई। इस दौरान फील्ड से नकारात्मक रिपोर्ट मिलने पर भाजपा के प्रदेश और शीर्ष नेतृत्व ने कई जीते हुए विधायकों, सांसदों के टिकिट काटकर उन्हें घर बैठाया और संगठन में भी आमूलचूल परिवर्तन किए। जबकि मध्यप्रदेश की कांग्रेस राजनीति अभी भी 80 के दशक के फुंके हुए कारतूसों के इशारों पर ही चल रही है। मध्यप्रदेश में तीसरी पीढ़ी का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने शाजापुर के एक साधारण परिवार और राजनीतिक पृष्ठ भूमि वाले युवा श्याम टेलर को भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपकर पार्टी की चौथी पीढ़ी का रास्ता साफ कर दिया है। टेलर के कंधों पर अगले एक दशक में मध्यप्रदेश में तैयार होने वाली पार्टी की चौथी पीढ़ी को चुनने की महति जिम्मेदारी भी है।
भाजपा ने जहां अभी से मध्यप्रदेश में चौथी पीढ़ी को तराशने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर 80 के दशक से जमे हुए कांग्रेस के क्षेत्रीय क्षत्रप परिवारवाद, पट्ठावाद और पुत्र मोह से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं। प्रदेश सहित जिलों की राजनीति में दो पीढ़ियों के काबिल और कुशल नेतृत्व क्षमता वाले युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के बाद अब ये फुंके हुए कारतूस पार्टी की चौथी पीढ़ी को भी दीमक की तरह चट कर जाना चाहते हैं। जिस पार्टी ने इन नेताओं को मान, सम्मान, प्रतिष्ठा, दौलत सबकुछ दिया, उसी पार्टी को इन लोगों ने बेहयाई के साथ मध्यप्रदेश में बर्बाद कर दिया और अभी भी अपनी फितरतों से बाज नहीं आ रहे हैं। मध्यप्रदेश की कांग्रेस राजनीति में उर्जावान और काबिल युवाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन ये फुंके हुए कारतूस और इनके क्षेत्रीय क्षत्रप पट्ठावाद, परिवारवाद और पुत्र मोह के कारण प्रतिभावान युवाओं को आगे ही नहीं बढ़ने देते हैं। पार्टी की पिछली दो पीढ़ी की जड़ों में मट्ठा डालकर उसे बर्बाद कर चुके नेता अब चौथी पीढ़ी की भ्रूण हत्या की कोशिशों में जुट गए हैं।
बहरहाल अपनी नाकामियों को छुपाने और पार्टी हाईकमान को बरगलाने के लिए मुख्य विपक्षी दल के पास ईव्हीएम का हथियार है। जब तक ईव्हीएम से वोटिंग होती रहेगी फुंके हुए कारतूस टिकिटों की नीलामी करेंगे और मतदाताओं द्वारा नकारे गए नेताओं के पैरों में घोड़े की नाल ठोंककर उन्हें दौड़ाते रहेंगे। हार की जिम्मेदारी लेने के लिए ईव्हीएम तो तैयार है ही। अब देखते हैं कि भाजपा की 5G टेक्नाॅलाॅजी के दौर में कांग्रेस के लैंड लाईन फोन कितने दिन ओर टिक पाते हैं।

Author: Hindusta Time News
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