वन विहीन जिले में आरा मशीनों पर कार्रवाई हकीकत या दिखावा..?

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सरकारी नियमों को धता बता रहे संचालक, मस्जिद परिसर में भी चल रही आरा मशीन
हेमंत आर्य। पिछले कुछ दिनों से जिला मुख्यालय एवं अंचलों की आरा मशीनें वन विभाग की टीम सहित प्रशासनिक अमले के निशाने पर है। शहरवासियों द्वारा पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर जिला मुख्यालय पर किए गए प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अमले को कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। ऐसे में सवाल उठता है कि वन विहीन जिले सहित जिला मुख्यालय पर सरकारी नियम, कायदों को धता बताकर संचालित हो रही इतनी अधिक आरा मशीनों की आवश्यकता क्या है ? आरा मशीनों पर प्रशासनिक कार्रवाई हकीकत है या दिखावा ?
उल्लेखनीय है कि गत 13 दिसंबर को हिंदू जागरण मंच एवं सर्व समाज के लोगों ने पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था। इसके बाद वन विभाग सहित प्रशासनिक अमला कुंभकर्णी नींद से जागा था और कार्रवाई की औपचारिकताओं को पूरा किया गया। प्रशासनिक अमले के पास यदि ठोस कार्रवाई की इच्छा शक्ति होती तो शायद सरकारी मापदंडों पर खरी नहीं उतर पा रही अधिकांश आरा मशीनें सील कर दी गई होती।
नियम विरूद्ध संचालित हो रही मशीनें
जिला मुख्यालय सहित आसपास के अंचलों में चल रही अधिकांश आरा मशीनें शासन के नियमों को कूड़ेदान में डालकर नियम विरुद्ध संचालित हो रही है। अधिकांश आरा मशीनों के संचालन में सरकारी नियमों और मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। कई आरा मशीन संचालकों के पास न तो शासन द्वारा निर्धारित स्थान (क्षेत्रफल) है और न ही लकड़ियों के भंडारण की उचित व्यवस्था। कई आरा मशीनें तो अन्य स्थानों से लाकर यहां स्थापित की गई हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इन आरा मशीन संचालकों द्वारा सरकारी नियमों का पालन ही नहीं किया जा रहा है तो ये संचालित कैसे हो रही हैं ? प्रशासनिक अधिकारियों ने क्या इन आरा मशीनों की लायसेंस प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों और सरकारी मापदंडों की जांच नहीं की। क्या प्रशासनिक अमला सिर्फ कार्रवाई का दिखावा ही कर रहा है ?
वन विहीन जिले में आरा मशीनों की भरमार
सरकारी दस्तावेजों में शाजापुर जिला वन विहीन घोषित है। जहां एक ओर शासन-प्रयासन यहां वन परिक्षेत्र विकसित करने के लिए आम लोगों सहित सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक संगठनों से पौधा रोपण करने की अपील करता है, वहीं दूसरी ओर शासन के नियमों को धता बताकर संचालित हो रही आरा मशीनों पर ठोस कार्रवाई करने की बजाए प्रशासनिक अमला महज औपचारिकताएं पूरी करता ही नजर आता है। वर्तमान दैनिक जीवन में जिला मुख्यालय पर तो लोगों को लकड़ी की इतनी आवश्यकता ही नहीं है, जितनी आरा मशीनें संचालित हो रही है वन विहीन जिले में।
मस्जिद परिसर में संचालित हो रही आरा मशीन
जिले के सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी जिला मुख्यालय शाजापुर पर मौजूद रहते हैं। जिला मुख्यालय पर ही बादशाही पुल स्थित जामा मस्जिद परिसर एवं उसके सामने आरा मशीन संचालित कर शासन के आदेशो का खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है और अधिकारी आंखें मूंदें बैठे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि वक्फ बोर्ड और माफी की जमीन पर आरा मशीन संचालित करने का लायसेंस किसने दिया ? यदि उक्त आरा मशीन संचालक के पास लायसेंस नहीं है तो मस्जिद परिसर में आरा मशीन कैसे और किसके आदेश से संचालित की जा रही है ? आरा मशीनों पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर ऐसे कई सवाल हैं जो महकमों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़े कर रहे हैं।
इनका कहना…
मस्जिद परिसर में आरा मशीन संचालित की जा रही है, जो गलत है। संबंधित व्यक्ति से कई बार चर्चा कर इस स्थान को खाली कराने के प्रयास किए गए है, लेकिन अभी तक मसले का निराकरण नहीं हो पाया है। समाज के सभी प्रमुख और वरिष्ठ लोगों से चर्चा कर मसले का हल निकालने की कोशिश की जाएगी।
काजी मोहसिनउल्ला, शहर काजी शाजापुर।

हेमंत आर्य
                      हेमंत आर्य
Hindusta Time News
Author: Hindusta Time News

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