चोरी की सरकारें या चोरों की सरकारें

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राकेश अचल। मुझे पता है कि ‘चोर’ और ‘चोरी’ असंसदीय शब्द नहीं हैं, इसलिए आज इसी विषय पर लिख रहा हूं वो भी बिना हलफनामे के, बिना गंगाजल उठाए। सच बोलने के लिए किसी हलफनामे की जरुरत नहीं होती और जो लोग हलफनामा देकर सच बोलते हैं वे अक्सर झूठ बोलते हैं। फिल्मों में गीता की कसम खाकर आपने कितने लोगों को झूठ, सफेद झूठ और सच बोलते देखा और सुना होगा, लेकिन झूठ हर हाल में झूठ होता है और सच हर हाल में सच।
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश में केंद्रीय चुनाव आयोग की मिलीभगत से होने वाले वोट चोरी के मामले को सप्रमाण मीडिया और विपक्ष के सामने रखा है। केंद्रीय और कर्नाटक चुनाव आयोग को राहुल गांधी द्वारा किया गया पर्दाफाश झूठ लगता है और केंचुआ ने राहुल गांधी से ये तमाम सबूत हलफनामे के साथ मांगे हैं। सवाल ये है कि केंचुआ किस अधिकार से हलफनामा मांग रहा है ? सीधी सी बात है कि यदि राहुल गांधी झूठे तथ्य देकर देश को भ्रमित कर रहे हैं या उनका इरादा केंचुआ को बदनाम करना है तो केंचुआ को राहुल गांधी से हलफनामे के साथ सबूत मांगने के बजाए उनके खिलाफ सीधे पुलिस या अदालत के पास जाना चाहिए। राहुल गांधी न हमारी जाति के हैं और न रिश्तेदार इसलिए मेरा कहना है कि पूरा देश यदि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के हर झूठ-सच पर यकीन करता है तो देश को लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल राजीव गांधी के हर झूठ और सच को भी काबिले यकीन मानना चाहिए। क्योंकि मोदी और गांधी ने लोकसभा में एक ही संविधान को साक्षी मानकर देश सेवा की शपथ ली है। दोनों जिम्मेदार सांसद हैं, जनप्रतिनिधि हैं। दोनों से हलफनामे नहीं मांगे जाना चाहिए। देश ने कभी मोदी जी से हलफनामा मांगते हुए ये नहीं पूछा कि सीजफायर के बारे में अमेरिका का दावा सही है या गलत ?
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा किए गए रहस्योदघाटन से एक बात प्रमाणित हो गई है कि देश की सरकार ही नहीं, बल्कि देश के तमाम राज्यों में बनीं डबल इंजिन की सरकारें चोरी के वोट से बनीं हैं। आप इन्हें चोरी की सरकारें या चोरों की सरकारें भी कहने के लिए स्वतंत्र हैं। खिचड़ी के पकने का पता डेगची के एक चावल से चल जाता है, ऐसे ही देश में हो रही वोट चोरी का पता एक विधानसभा क्षेत्र के मतदान और मतदाता सूचियों की पड़ताल से चल चुका है। अब केंचुआ बगलें झांके या राहुल गांधी से हलफनामा मांगे, कुछ होने वाला नहीं है। ये मामला हालांकि किसी भी अदालत में चुनौती देने लायक है, लेकिन इसका निराकरण अदालत से शायद ही हो सके क्योंकि अदालत भी केंचुआ की तरह पहले हलफनामा मांगेगा। वैसे भी अदालत का एक हिस्सा तो राहुल गांधी को सच्चा भारतीय नहीं मानता।
वोट चोरी ठीक वैसा ही अपराध है जैसे कि आपके घर से जेवर, गैस सिलेंडर या किसी दूसरे माल मशरूके की चोरी होती है। वोट चोरी रोकने के लिए केंचुआ और सत्ता रूढ़ दल तो खुद कुछ करने से रहा, क्योंकि इन दोनों पर ही वोट चोरी का आरोप है। अब वोटर को अपना वोट खुद सम्हालना चाहिए। जो राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता है वे मतदान स्तर पर सतर्क रहें। फर्जीवाडा न होने दें। वोट की चोरी रोकना बहुत कठिन नहीं है। आखिर जो होमवर्क राहुल गांधी की टीम ने एक विधानसभा क्षेत्र में किया है वो सभी चुनाव क्षेत्रों में किया ज सकता है। मुझे देश के मुख्य केंचुआ के अलावा राज्यों के केंचुआ से भी न्याय की कोई उम्मीद नही है। देश में वोट चोरी से सरकारें न बनें, वोट चोरों की सरकारें न बनें, ये भारतीय लोकतंत्र के लिए मोदी युग की सबसे बड़ी चुनौती है।
दरअसल वोट बेशकीमती चीज है इसलिए उसकी चोरी होना स्वाभाविक है। यदि किसी दल को जनता अपना कीमती वोट नहीं देती तो सत्ता लोलुप दल वोट की चोरी से बाज नहीं आता। कांग्रेस से भाजपा ने बहुत कुछ सीखा है, लेकिन अब मौका आ गया है कि कांग्रेस भी भाजपा से कुछ सीखे वोट चोरी के अलावा। कांग्रेस वोट मांगती है, चोरी नहीं करती इसलिए भुगतती है। चोरी मत करो लेकिन चोरी रोको तो सही।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

“श्री राकेश अचल जी मध्यप्रदेश के ऐसे स्वतंत्र लेखक हैं जिन्होंने 4 दशक (40 साल) तक अखबारों और टीवी चैनलों के लिए निरंतर काम किया। देश के प्रमुख हिंदी अखबार जनसत्ता, दैनिक भास्कर, नईदुनिया के अलावा एक दर्जन अन्य अखबारों में रिपोर्टर से लेकर संपादक की हैसियत से काम किया। आज तक जैसे टीवी चैनल से डेढ़ दशक (15 सालों) तक जुड़े रहे। आकाशवाणी, दूरदर्शन के लिए नियमित लेखन किया और पिछले 15 सालों से स्वतंत्र पत्रकारिता तथा लेखन कर रहे है। दुनिया के डेढ़ दर्जन से अधिक देशों की यात्रा कर चुके अचल ने यात्रा वृत्तांत, रिपोर्टज, गजल और कविता संग्रहों के अलावा उपन्यास विद्या पर अनेक पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान भी मिले हैं”।
Hindusta Time News
Author: Hindusta Time News

27 Years Experience Of Journlism

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