राकेश अचल। एक लंबे समय बाद सुर्खियों के राजनीतिक प्रबंधन को धता बताते हुए एक 21 साल की भारतीय क्रिकेटर शैफाली आज की सबसे बड़ी सुर्खी है। देश-दुनिया की दिलचस्पी आज न बिहार विधानसभा चुनाव में है और न किसी टैरिफ वार में। आज चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ शैफाली की धूम है। आईए सबसे पहले शैफाली का मतलब समझ लें। शैफाली एक सुगंधित फूल को कहते हैं, जो प्रायः रात में खिलता है। शैफाली शरद ऋतु का फूल है। शैफाली का दूसरा नाम हरसिंगार भी है यानि पारिजात के फूल। शैफाली सुंदरता और प्रकृति का प्रतीक भी है।
आज से 23 साल पहले कांटा गर्ल के रुप में एक ओर शैफाली की खुशबू इस देश ने महसूस की थी। उस लड़की का नाम भी शैफाली था, शैफाली जरीवाला। आज देश, दुनिया, क्रिकेट की दुनिया शैफाली वर्मा की खुशबू पर मुग्ध है। कोई 21 साल की शैफाली वर्मा इस वक्त सुर्खियों में हैं। शैफाली ने महिला वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई है। यह वही शैफाली वर्मा हैं जिनको एक वक्त वर्ल्ड कप के स्क्वाड में जगह भी नहीं मिली थी, लेकिन प्रतिक्षा रावल को बांग्लादेश के खिलाफ चोट लगी और शैफाली की टीम में एंट्री हुई। इसके बाद शैफाली ने जो फाइनल मैच में भारत की महिला टीम के लिए किया, वो अब एक मील का पत्थर बन चुका है।
शैफाली वर्मा ने महिला वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शानदार शुरुआत की। उनके और स्मृति मंधाना के बीच 104 रन की साझेदारी हुई। शैफाली हालांकि शतक नहीं ठोक पाई। उन्होंने 78 गेंदों पर 87 रन बनाए। शैफाली की पारी में 7 चौके और 2 छक्के शामिल थे। इसके बाद उन्होंने गेंदबाजी करते हुए 2 अहम विकेट भी लिए। अपने इस प्रदर्शन के लिए उन्हें फाइनल में प्लयेर ऑफ द मैच का अवॉर्ड भी मिला, जिसके चलते उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। शैफाली पुरुष और महिला वर्ल्ड कप के इतिहास में फाइनल या सेमीफाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बन गई हैं। शैफाली वर्मा ने यह कारनामा 21 साल और 279 दिन की उम्र में किया। 30 अक्तूबर को खेले गए सेमीफाइनल में जब शैफाली वर्मा मैदान पर उतरीं तो उनका खेल पांच गेंद से आगे नहीं बढ़ पाया था, लेकिन तीन दिन बाद दो नवंबर को शैफाली उन्हीं तेवरों के साथ मैदान में उतरीं जिसकी वजह से उन्हें महज 15 साल की उम्र में भारतीय टीम के लिए डेब्यू करने का मौका मिल गया था।
शैफाली ने शुरुआत से ही अफ्रीका की गेंदबाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया और शुरुआती 10 ओवर में स्मृति मंधाना के साथ मिलकर 64 रन जोड़े। स्मृति के आउट होने के बाद भी शैफाली ने तेजी से रन बनाना जारी रखा और भारतीय टीम के लिए एक अच्छे स्कोर की नींव रखी। शैफाली ने दो छक्के और सात चौकों की शैफाली 78 गेंद में 87 रन बनाए। शैफाली जब आउट हुई तो भारत का स्कोर 27.5 ओवर में 166 रन था। नया कीर्तिमान रचने के बाद शेफाली ने कहा “मैंने पहले भी कहा था कि भगवान ने मुझे कुछ स्पेशल करने के लिए भेजा है और आज वैसा हुआ है। ये मुश्किल था, लेकिन मैंने खुद में विश्वास बनाए रखा। मैंने खुद को भरोसा दिलाया कि मैं कुछ भी कर सकती हूं।”
भगवान कुछ ही लोगों को खास करने के लिए भेजता है, लेकिन सब शैफाली जैसा रच नहीं पाते। आज शैफाली के कसीदे लिखते हुए संतोष होता है। काश हर घर में एक शैफाली जन्म ले। शैफाली ने लड़कियों के लिए एक रास्ता खोला है। शैफाली के साथ ही पूरी टीम को इस महान उपलब्धि के लिए बधाईयां।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

Author: Hindusta Time News
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