राकेश अचल। कहने को मप्र अजब-गजब है ही, लेकिन अब लगता है कि यहां एक और गजब होने वाला है। मप्र के सबसे बड़े जिले इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने संघ कार्यालय में हाजरी लगाकर संकेत दिए हैं कि भविष्य में पूरी नौकरशाही संघ के इशारे पर चलेगी।
इंदौर में दूषित पानी से हुई दो दर्जन मौतों के बाद सरकार ने तो इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा को भोपाल तलब नहीं किया, लेकिन आरएसएस के इंदौर कार्यालय ने वर्मा को तलब कर लिया। संघ ने जो किया सो ठीक, लेकिन कलेक्टर शिवम वर्मा भी लोक-लाज और आईएएस सेवा की आचार संहिता की परवाह किए बगैर महापौर पुष्यमित्र के साथ संघ कार्यालय जा पहुंचे। संघ कार्यालय से कलेक्टर को क्या दिशा निर्देश मिले ये तो पता नहीं, लेकिन वर्मा जी सुर्खियों में हैं। शिवम वर्मा 2013 बैच के आईएएस अफसर हैं। आईएएस शिवम वर्मा इंदौर कलेक्टर बनने से पहले इंदौर नगर निगम के कमिश्नर थे। उनकी पत्नी जयति सिंह 2016 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। जयति सिंह उज्जैन जिला पंचायत की सीईओ थीं। अब उन्हें बड़वानी का कलेक्टर बनाया गया है। इंदौर निगमायुक्त की हैसियत से ही वर्मा दंपत्ति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संघ की नजर में चढे।
इंदौर कलेक्टर बनने से पहले वह श्योपुर कलेक्टर रह चुके हैं। अब वह दूसरी बार कलेक्टर बने हैं। वहीं जयति सिंह का बैच 2016 है। वह मध्यप्रदेश के कई जिलों में तैनात रही हैं। पहली बार वह अपने करियर में कलेक्टर बनी हैं। हालांकि शिवम वर्मा पर मोहन सरकार ने बड़ा भरोसा जताया है। उन्हें श्योपुर कलेक्टर के पद से इंदौर लाकर नगर निगम का कमिश्नर बनाया गया था। इंदौर मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी है। इस जिले का प्रभार खुद सीएम मोहन यादव के पास है। हाल की घटित घटनाओं से सरकार की फजीहत हो रही थी। इसके बाद शिवम वर्मा को इंदौर की कमान सौंपी गई है। इससे साफ है कि शिवम वर्मा अब सीएम मोहन यादव के गुड बुक में हैं। शिवम वर्मा की पत्नी जयति सिंह की छवि कड़क अधिकारी के रूप में रही है। डबरा (ग्वालियर) में एसडीएम रहने के दौरान उन्होंने अवैध काम करने वाले लोगों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी। इनके नाम से माफियाओं की नींद उड़ी रहती थी। जयति सिंह को वहां से हटाने के लिए तत्कालीन मंत्री इमरती देवी ने उस समय मोर्चा खोला था। इमरती देवी ने यहां तक कह दिया था कि डबरा में या तो एसडीएम रहेगी या फिर मैं। इसके बाद सीएम से जाकर शिकायत की थी। कुछ दिनों बाद एसडीएम का वहां से तबादला हो गया था।
शिवम वर्मा के बाद सुर्खियों में विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता हैं। वे भी पहली बार कलेक्टर बनाए गए। अंशुल इससे पहले जनसंपर्क संचालक थे। उन्होंने एक छात्रावास अधीक्षक को जूते मारने की धमकी दे डाली। जहां तक हमें पता है कि भाप्रसे के प्रशिक्षण में गालियां देने का कोई पाठ्यक्रम नही है। इन दोनों घटनाओं को लेकर मप्र के मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। लगा जैसे कुछ हुआ ही नहीं। कोई कलेक्टर संघ कार्यालय पर हाजरी दे या कोई जूता मारने की धमकी दे, सरकार को कोई फर्क नही पड़ता, लेकिन जनता को फर्क पडता है। ये सिलसिला कहां जाकर थमेगा पता नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि संघ और उसके शाखामृग को मजा आ गया है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

Author: Hindusta Time News
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