‘पुश-अप’ पालटिक्स का प्रतिफल निराशाजनक

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राकेश अचल। एक पत्रकार के रूप में बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे औरों की तरह हमारे लिए भी अप्रत्याशित हैं। ये नतीजे ‘पुश-अप’ पालटिक्स पर तो भारी हैं ही साथ ही हम जैसे निर्दलीय लेखकों के तजुर्बों और आकलनों को धता बताते दिखाई दे रहे हैं। इन नतीजों को लेकर अब अरण्यरोदन से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। हां ये नतीजे भविष्य की राजनीति के लिए खासतौर पर पुश अप पालटिक्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती जरूर हैं।
हम अपनी बात करें तो पिछले 45 साल में हमने कोई 11 आम चुनाव और करीब 150 से ज्यादा विधानसभा चुनाव होते देखे हैं। अकेले मध्यप्रदेश में 10 विधानसभा चुनावों से हम सीधे जुड़े रहे हैं, लेकिन जैसा चुनाव 2025 में बिहार विधानसभा का देखा है, वैसा चुनाव न कभी देखा है और न कभी शायद देख पाएंगे। क्योंकि अब लगने लगा है कि चुनाव कठपुतली के नाच जैसे हो गए हैं। बिहार चुनाव के सभी सीटों के चुनाव परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक सत्तारूढ़ राजग ने शुक्रवार को बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में 202 सीट जीतकर शानदार जीत दर्ज की।
आयोग के अनुसार भाजपा 89 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उसकी सहयोगी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू ने 85 सीट जीती हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19 सीट मिली हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने पांच सीट जीतीं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने चार सीट जीतीं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा व राज्य मंत्री प्रेम कुमार, महेश्वर हजारी, संजय सरावगी, भाजपा की मैथिली ठाकुर राजग खेमे से प्रमुख विजेताओं में शामिल हैं।
राजद नेता और ‘इंडिया’ गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव, दिवंगत मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शाहाब और भाकपा (माले) लिबरेशन के संदीप सौरव विपक्षी खेमे से प्रमुख विजेताओं में शामिल हैं। तेजस्वी यादव ने राघोपुर सीट से भाजपा के सतीश कुमार को 14,532 मतों के अंतर से हराया। बिहार में एसआईआर के प्रचंड विरोध के बावजूद ‘इंडिया’ गठबंधन को केवल 34 सीट मिलीं। राजद को 25 सीट मिलीं, जबकि कांग्रेस को 6, भाकपा (माले) लिबरेशन को 2 और माकपा को 1 सीट मिली। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम ने पांच सीट जीतीं, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी को एक-एक सीट मिली।
आपको बता दें कि भाजपा और जदयू ने 101-101 सीट पर चुनाव लड़ा था, जबकि उनकी सहयोगी लोजपा (रालोद) ने 28 सीट पर उम्मीदवार खड़े किए थे। ‘इंडिया’ गठबंधन में राजद ने 141 सीट पर चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस ने 61 और भाकपा (माले) लिबरेशन ने 20 सीट पर चुनाव लड़ा। महागठबंधन मुख्यमंत्री का नाम और चेहरा देने के साथ ही घोषणा पत्र जारी करने में भी सत्तारूढ गठबंधन से आगे रहा, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। इस चुनाव मे लोक हारा और तंत्र जीता ये प्रमाणित हो गया है। इस सोच को आप खीज, हताशा कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि महागठबंधन का युवा नेतृत्व जनता को आंदोलित करने में ही लगा रहा और वोट चोर खेल कर गए।
जनता से जुड़ने के लिए महागठबंधन ने क्या नहीं किया ? राहुल गांधी ने तालाब में छलांग लगाई, पुश अप लगाए। तेजस्वी ने जनता से जुड़े हर मुद्दे को उठाया, लेकिन या तो वोटर उठा ही नहीं या फिर उसके तनकर खड़े होने से पहले ही वोटों की गठरी बांधकर वोट चोर फरार हो गए। बिहार में मोकामा से जदयू के अनंत सिंह का चुनाव के बीच एक हत्या के मामले में जेल जाने के बाद जीतना ये प्रमाणित कर रहा है कि मतदाता जंगलराज के खौफ से बाहर नहीं निकला है। मोकामा में अनंत सिंह भले जेल में रहा, लेकिन केंद्रीय मंत्री ललन सिंह खुद अनंत सिंह बन गए। जाहिर है कि जनता बाहुबलियों के खिलाफ डटकर खड़ी नही हुई।
कोई माने या न माने लेकिन हकीकत ये है कि भाजपा और संघ भारतीय लोकतंत्र को आगे-पीछे विपक्ष विहीन बना देने के लिए कटिबद्ध है और इसका बिस्मिल्लाह हो चुका है। विपक्ष विहीन लोकतंत्र के उदाहरण चीन, रूस, दक्षिण कोरिया समेत तमाम देशों में देखे जा सकते हैं। प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने कांग्रेस में विभाजन की आशंका जताकर ये संकेत दे दिए हैं कि नागपुर का अगला निशाना मुख्य विपक्ष कांग्रेस ही है। नागपुर छाप भाजपा, कांग्रेस से पहले तमाम विपक्षी दलों को समाप्त करने के प्रयास कर ही चुकी है। शिवसेना और एनसीपी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
अब ये कांग्रेस पर निर्भर है कि वो पुश अप लगाती रहे या अपंजीकृत सौ साला संघ और युवा भाजपा की घृणित साजिशों का मुकाबला करने के लिए अपने संगठन, कार्य शैली और तकनीक में समय साक्षेप तब्दीली करे। हमारी श्रीमती नान पालटीकल हैं और बिहार के चुनाव परिणाम को लेकर कहतीं हैं कि बिहार की जनतई (जनता ही) मूर्ख है, लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता। मेरा मानना है कि बिहार की भोली भाली जनता को मूर्ख बनाया गया है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

“श्री राकेश अचल जी मध्यप्रदेश के ऐसे स्वतंत्र लेखक हैं जिन्होंने 4 दशक (40 साल) तक अखबारों और टीवी चैनलों के लिए निरंतर काम किया। देश के प्रमुख हिंदी अखबार जनसत्ता, दैनिक भास्कर, नईदुनिया के अलावा एक दर्जन अन्य अखबारों में रिपोर्टर से लेकर संपादक की हैसियत से काम किया। आज तक जैसे टीवी चैनल से डेढ़ दशक (15 सालों) तक जुड़े रहे। आकाशवाणी, दूरदर्शन के लिए नियमित लेखन किया और पिछले 15 सालों से स्वतंत्र पत्रकारिता तथा लेखन कर रहे है। दुनिया के डेढ़ दर्जन से अधिक देशों की यात्रा कर चुके अचल ने यात्रा वृत्तांत, रिपोर्टज, गजल और कविता संग्रहों के अलावा उपन्यास विद्या पर अनेक पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान भी मिले हैं”।
Hindusta Time News
Author: Hindusta Time News

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